कोरोना वायरस और बरसात का मौसम: असली चुनौतियां अब शुरू होंगी अब , PM मोदी ने भी पहले चेतावनी दी थी!

कोरोना वायरस का संक्रमण अब धीरे-धीरे अपने चरम स्थिति में पहुंच रहा है. इसके साथ ही देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां सामने खड़ी हैं.

पीएम मोदी ने कहा है कि गांवों मैं इस कोरोना फैलने से रोकना है!

कोरोना वायरस का संक्रमण अब धीरे-धीरे अपने चरम स्थिति में पहुंच रहा है. इसके साथ ही देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां सामने खड़ी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में पीएम मोदी ने कहा है कि धीरे-धीरे कामकाज शुरू करना और इस बीमारी के फैलने को रोकना, ये दो मोर्चों पर बड़ी चुनौती है इस पर मिलकर काम करना होगा. पीएम मोदी ने इस बात के भी साफ संकेत दिए हैं कि लॉकडाउन को एक ही बार में हटाया जाना संभव नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गांवों में यह बीमारी न फैलने पाए इसके लिए हमें हर संभव कोशिश करनी चाहिए. पीएम मोदी की ये चिंता दरअसल अब एक बड़ी चुनौती है. क्योंकि बीते 15 दिनों से बड़ी संख्या प्रवासी अपने घरों की वापस लौट रहे हैं.

इस दौरान कई जगहों से खबरें आई हैं कि इन प्रवासियों में भी कोरोना वायरस पाया गया है. बीते कुछ दिन पहले महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश के बस्ती पहुंचे 7 प्रवासियों में कोरोना वायरस पाया गया है. इसी तरह कई प्रवासी जो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों यात्रा कर रहे हैं उनमें भी कोरोना वायरस पाए जाने की आशंका है. बिहार से जो रिपोर्ट आई है जिसमें क़रीब डेढ़ लाख लोग पिछले एक हफ़्ते में लौटे हैं. इनमे से 1900 लोगों का रैंडम टेस्ट हुआ और 148 लोगों में कोरोना का संक्रमण पाया गया. अभी तीन लाख से अधिक लोगों को आना है. जिस दिन अधिक जांच हुई,ज्यादा मरीज़ मिले.

जैसे दस मई को 1907 सैम्पल में से 89 लोगों में संक्रमण पाया गया. एक दिन पहले 1388 में 52 लोगों में ये संक्रमण पाया गया था. पांच मई को 581 की जांच हुई और 7 लोग बीमार पाए गए. छह मई को 596 लोगों की जांच हुई और फिर 7 ही लोग संक्रमित मिले थे. फिलहाल बिहार सरकार ने केंद्र सरकार से 12 आरएनए एस्ट्रैक्टर, 12 आरटी पीसीआर सहित कई उपकरणों की मांग की है. प्रवासयों की वजह से कई ये संक्रमण कहीं गांवों न फैलने लगे ये राज्य सरकारों और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में साफ कहा है कि जब तक हमारे पास कोई वैक्सीन या इसका कोई तोड़ नहीं मिल जाता है सोशल डिस्टैसिंग ही इस बीमारी के खिलाफ एक मात्र उपाय है. प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकारों को यह भी चेताया कि कुछ दिनों में मानसून आने वाला है और मौसमी बीमारियों का भी दौर आएगा इसके लिए हमें अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को अभी से और तैयार करना होगा.

इन सब चुनौतियों के बीच कई सेक्टरों में कामकाज शुरू हो गया या फिर शुरू करने की तैयारी है. जैसे रियल सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिटें हैं. वहां पर केंद्र सरकार की ओर से सोशल डिस्टैसिंग जैसी कई दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं इस पर राज्यों के साथ-साथ लोगों की ध्यान रखना होगा. यहां एक बात और ध्यान में रखनी है विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अधिकारी ने कुछ दिन पहले ही एनडीटीवी से बातचीत में कहा था कि भारत में अभी कोरोना वायरस जुलाई के पहले आखिरी हफ्ते तक अपने चरम स्थिति में होगा. अभी तक इसलिए ज्यादा केस नहीं आए क्योंकि सरकार ने समय रहते कदम उठा लिए थे लेकिन जैसे-जैसे लॉकडाउन हटेगा केस बढ़ते चले जाएंगे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे घबराने की जरूरत नही है.

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कोरोना वायरस जैसी बड़ी महामारी से बचने के लिए हम सभी लोगो को इक साथ मिल कर इस महामारी का सामना करना पड़ेगा! कृपया करे के अपना सहयोग राष्ट्र के हित मैं दीजिये!

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