9 को क्वारेंटाइन खत्म, 10 को हाजिर! कोरोना को हराकर ड्यूटी पर पहुंचे डॉक्टर!

सूरत. आज कोरोना के खिलाफ पूरा विश्व जूझ रहा है। ऐसे में कोरोना को हराने के लिए अनेक कोरोना वॉरियर्स दिन-रात काम पर लगे हैं। इस दौरान कई डॉक्टर्स और नर्स भी इसकी चपेट में आए हैं। फिर भी इन्होंने मरीजों के इलाज से मुंह नहीं मोड़ा। इसी में से हैं डॉ. मयूर कलरसिया, जो कोरोना की चपेट में आ गए थे और ठीक होते ही ड्यूटी पर हाजिर हो गए।

सीमा पर लड़ने वाले सैनिक घायल होते हैं, तो वे लड़ना छोड़ नहीं देते!

डॉ. मयूर की सावधानी से परिवार के 9 सदस्य कोरोना से बचे!

शहर के 28 वर्षीय डॉ. मयूर लाखाभाई कलसरिया। 16 अप्रैल को नए सिविल हॉस्पिटल में कोरोना पॉजीटिव मरीजों के उपचार के दौरान उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। इन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। दस दिन के क्वारेंटाइन में रहने के बाद स्वस्थ होते ही वे तुरंत ड्यूटी पर हाजिर हो गए। इस तरह से वे अन्य डॉक्टर्स के लिए एक मिसाल बन गए। अपनी सावधानी से उन्होंने परिवार के 9 सदस्यों को भी कोरोना के संक्रमण से बचाया।

सैनिकों की तरह लड़ रहे हैं!

डॉ. मयूर ने बताया कि सीमा पर लड़ने वाले सैनिक यदि घायल हो जाते हैं, तो क्या वे लड़ना छोड़ देते हैं? इसी तरह आज हम कोरोना से लड़ रहे हैं, यदि हम इसकी चपेट में आ गए, तो क्या हम अपने कर्तव्य से डिग जाएं। डॉक्टर्स भी संक्रमित हो सकते हैं, इसकी पूरी संभावना भी है। मैं कोरोना से संक्रमित हुआ, यह मेरे लिए अल्प विराम था, पूर्ण विराम नहीं।

मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है!

कोरोना से संक्रमित होने के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैंने कोरोना को हराया है। मेरे आराध्य ने कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए ही मुझे स्वस्थ किया है। मेरा पहला और अंतिम कर्तव्य है मरीजों की सेवा करना, जो मैं करता रहूंगा। अब मैं अपना 100% दूंगा।

परिवार को दूर रखा!

कोरोना से संक्रमित होने के बाद अपनी दो साल की बेटी आद्या और ब्लड प्रेशर के मरीज पिता को अपने क्लोज कांटेक्ट से दूर रखा। कोरोना से संक्रमित होने के पहले ही मैं हर सप्ताह घर आता। एक कमरे में कपड़े बदलता, हॉस्पिटल के मैले कपड़े वॉशिंग मशीन में डाल देता। सेल्फ प्रिकॉशन के कारण मैं अपने परिवार को बचा पाया।

उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे!

डिस्चार्ज होने के बाद घर और सोसायटी के लोगों ने मेरा भव्य स्वागत किया। मरीजों को स्वस्थ करने वाला आज खुद स्वस्थ होकर आया है। इसी भाव ने सभी की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए। मां ने कहा- हम सब दिन-रात ईश्वर से यही प्रार्थना करते कि तुम जल्दी ही ठीक हो जाओ। ईश्वर ने हमारी सुन ली। डिस्चार्ज होने के बाद जब स्नान करके बाहर आया, तो बेटी ने मुझे गले लगा लिया, यह क्षण मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।

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